UK संसद ने Google और Apple
ब्रिटेन की संसद ने Google और Apple जैसी टेक दिग्गज कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संसद के सदस्यों (MPs) का कहना है कि ये कंपनियां जानबूझकर ऐसे फीचर्स लागू करने में देरी कर रही हैं, जो मोबाइल चोरी को रोका जा सकता है।
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क्या है प्रस्तावित समाधान?
ब्रिटेन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने 18 महीने पहले एक तकनीकी सुझाव दिया था:
जब कोई स्मार्टफोन चोरी होता है और उसे IMEI नंबर के आधार पर ब्लॉक किया जाता है, तो वह डिवाइस अगर किसी और देश में उपयोग करने की कोशिश करता है, तो Google या Apple को उसे अपने क्लाउड सर्विस से ऑटोमैटिक ब्लॉक करना चाहिए।
MP का आरोप क्या है?
संसद का कहना है कि Google और Apple को यह सुझाव काफी पहले दिया गया था, लेकिन अब तक दोनों कंपनियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सिर्फ “हम विचार कर रहे हैं” जैसे जवाब मिलते रहे। MPs ने इस देरी को “जानबूझकर नजरअंदाज करना” बताया है।
चोरी के आंकड़े डरावने हैं
सिर्फ लंदन में पिछले साल 80,000 से ज्यादा स्मार्टफोन चोरी हुए। इनमें से अधिकतर चोरी के बाद दूसरे देशों में तस्करी कर दिए गए। अगर Google और Apple ने समय रहते क्लाउड ब्लॉकिंग फीचर लागू कर दिया होता, तो यह संख्या काफी कम हो सकती थी।
कंपनियों का बचाव
Apple और Google दोनों का कहना है कि वे यूज़र्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी नया फीचर सुरक्षा जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही लागू किया जा सकता है। हालांकि MPs इस बात से संतुष्ट नहीं हैं।
क्या असर पड़ेगा आगे?
अगर UK सरकार कंपनियों को कानूनन बाध्य करती है, तो हो सकता है कि आने वाले समय में चोरी के स्मार्टफोन पर सख्त टेक्नोलॉजी आधारित पाबंदियां देखने को मिलें। इससे भारत सहित दूसरे देशों को भी ऐसी ही व्यवस्था अपनाने का रास्ता मिल सकता है।
निष्कर्ष
स्मार्टफोन चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि यूज़र्स की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दें। जनता को भी यह जानना जरूरी है कि उनका डिवाइस सिर्फ एक गैजेट नहीं, एक संवेदनशील डिजिटल संपत्ति है।
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