Maalik Movie Review 2025 राजकुमार राव का अब तक का सबसे खतरनाक अवतार

Maalik Movie Review 2025

2025 की बहुप्रतीक्षित फिल्म मालिक, निर्देशक पुलकित के निर्देशन में बनी एक एक्शन-थ्रिलर है जो दर्शकों को 1988 के इलाहाबाद की गलियों में ले जाती है — एक ऐसी दुनिया जहाँ सत्ता, अपराध, जाति और धर्म की राजनीति आपस में उलझ चुकी है।

राजकुमार राव, जिन्होंने अब तक भावुक, संवेदनशील और सामाजिक भूमिकाएँ निभाई हैं, इस बार एक खतरनाक, ठंडे और शक्तिशाली गैंगस्टर की भूमिका में दिखाई देते हैं। यह फिल्म उनके करियर का अब तक का सबसे गहरा और डरावना किरदार प्रस्तुत करती है।


कहानी का सार

फिल्म की कहानी इक़बाल खान (राजकुमार राव) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक गरीब मुस्लिम परिवार में जन्मा है और बचपन से ही भेदभाव, अन्याय और शोषण का शिकार होता है। उसका परिवार राजनीति, पुलिस और अपराधियों की मिलीभगत का शिकार बनता है।

इक़बाल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में कदम रखता है। कुछ ही सालों में वह बन जाता है — “मालिक” — एक ऐसा शख्स जिसे पूरा शहर डरता है, लेकिन जिसे कुछ ही लोग समझते हैं।

लेकिन जैसे-जैसे उसका वर्चस्व बढ़ता है, वैसे-वैसे उसका गिरना भी शुरू होता है। फिल्म उसकी चढ़ाई और पतन दोनों की यात्रा को बेहद ईमानदारी से दिखाती है।


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मुख्य कलाकारों का अभिनय

राजकुमार राव – इक़बाल / मालिक के रूप में

राजकुमार राव इस फिल्म में एक नया स्तर छूते हैं। उन्होंने सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी खुद को इस किरदार में ढाल लिया है।

उनका गंभीर चेहरा, तीखी नज़रें, भारी आवाज़ और खामोश क्रोध — हर फ्रेम में असर डालता है।
उनके कुछ डायलॉग्स जैसे:

“इंसाफ जब मरता है, तब मालिक पैदा होता है।”
यादगार बन जाते हैं।

प्रसेनजीत चटर्जी – इंस्पेक्टर विक्रम प्रताप

एक अनुभवी पुलिस अधिकारी के रूप में उनका किरदार फिल्म में नैतिकता और कानून के संघर्ष का प्रतीक है। वह मालिक के बचपन से उसके अपराधी बनने तक की कहानी जानते हैं, लेकिन खुद कब और कैसे प्रतिक्रिया करें, यह तय करने में उलझे रहते हैं।

मानुषी छिल्लर – रुकसाना

एक भावनात्मक किरदार, जो इक़बाल की इंसानियत को जीवित रखने की कोशिश करती है। उनका किरदार ज्यादा समय तक स्क्रीन पर नहीं रहता, लेकिन उनके दृश्यों में सच्चाई और गहराई होती है।

हुमा कुरैशी – विशेष गीत में अतिथि भूमिका

फिल्म के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आने वाला क्लब सीन, जिसमें हुमा कुरैशी का डांस नंबर है, सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि कहानी में नया मोड़ लाता है।


निर्देशन और पटकथा

निर्देशक पुलकित ने फिल्म को सिर्फ एक एक्शन-थ्रिलर के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दस्तावेज़ की तरह पेश किया है।

फिल्म न तो अपराध को महिमामंडित करती है, और न ही मालिक को सीधे ‘हीरो’ या ‘विलेन’ बनाती है। वो एक ऐसा इंसान है जो हालातों का शिकार है, लेकिन जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

पटकथा में फ्लैशबैक और वर्तमान समय के दृश्यों को बड़ी खूबसूरती से जोड़ा गया है।


सिनेमाटोग्राफी और लोकेशन

फिल्म की शूटिंग लखनऊ, कानपुर, बनारस और उन्नाव जैसी जगहों पर की गई है। दृश्य बहुत ही यथार्थवादी हैं — पुराने मकान, संकरी गलियाँ, टूटी सड़कों और धूल भरे बाज़ारों में कैमरा घूमता है।

रात के दृश्य अंधेरे और छायाओं से भरे हैं, जो किरदारों के मनोभावों को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।


संगीत और पृष्ठभूमि स्कोर

सचिन-जिगर द्वारा दिया गया संगीत फिल्म का एक मजबूत पक्ष है। दो प्रमुख गीत हैं:

  1. “नामुमकिन” – मालिक के उत्थान को दर्शाता धीमा, भावुक गीत।
  2. “दिल थाम के” – विश्वासघात के समय बजता थ्रिलर सॉन्ग, जो एड्रेनालिन बढ़ा देता है।

केतन सोधा का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की गंभीरता को और बढ़ा देता है।


मुख्य विषयवस्तु और प्रतीक

🪙 सत्ता और भ्रष्टाचार

फिल्म बताती है कि सत्ता किस तरह एक इंसान को पूरी तरह बदल सकती है। मालिक किसी और से नहीं, बल्कि उसी सिस्टम से लड़ता है, जिसने उसे बनाया।

धर्म और पहचान

बिना भाषणबाज़ी के फिल्म ये दिखाती है कि कैसे धार्मिक पहचान को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

न्याय बनाम बदला

मालिक का किरदार हमेशा इस दुविधा में रहता है — क्या वह इंसाफ चाहता है या सिर्फ बदला?


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सर्वश्रेष्ठ दृश्य

मालिक द्वारा एक राजनीतिक नेता को दी गई चेतावनी:
“ये ज़मीन तुम्हारी नहीं, हमारी भी नहीं… लेकिन डर उसी का चलेगा जो लेने की हिम्मत रखे।”

पुलिस स्टेशन में 5 मिनट लंबा सीन — बिना किसी संगीत के, सिर्फ नज़रों की टक्कर और संवाद।

अंतिम गोलीबारी — नैतिकता और भय का चरम।


फिल्म की खूबियाँ

राजकुमार राव का जबरदस्त अभिनय

सशक्त पटकथा और निर्देशक की दृष्टि

वास्तविक लोकेशन और कैमरा वर्क

गहराई वाले विषय — सिर्फ एक्शन नहीं, सोच भी

सामाजिक संदर्भ और भावनात्मक स्तर पर पकड़


कमज़ोरियाँ (थोड़ी बहुत)

बीच का हिस्सा थोड़ा धीमा लगता है

सह-कलाकारों के लिए कम स्क्रीन टाइम

कुछ दर्शकों को फिल्म का ग्रे टोन भारी लग सकता है

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निष्कर्ष

“मालिक” एक मसाला फिल्म नहीं है। यह एक मजबूत, यथार्थवादी और गंभीर फिल्म है जो दिखाती है कि समाज किस तरह अपराध को जन्म देता है, और कैसे इंसान सत्ता के लालच में अपने मूल्यों को खो देता है।

राजकुमार राव ने एक ऐसी भूमिका निभाई है जिसे सालों तक याद रखा जाएगा।
निर्देशक पुलकित ने एक ऐसी कहानी रची है जो न सिर्फ चौंकाती है, बल्कि सोचने पर भी मजबूर करती है।

यदि आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरी सोच छोड़ जाती हैं — तो मालिक को देखना अनिवार्य है।

Chandan is an experienced digital journalist who has been doing in-depth analysis of national and international news for the last 7 years. Chandan's reporting on News-4u.in is a blend of truth, speed and journalism. He has done ground-level coverage of important events in politics, technology, sports and entertainment.

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