रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है इस सुनसान गाँव में”

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

राजस्थान के नागौर ज़िले के पास एक सुनसान गाँव “चाँदवाली” है, जहाँ लोग दिन ढलते ही दरवाज़े बंद कर लेते हैं। लेकिन इसकी सबसे डरावनी बात है — वहां हर पूर्णिमा की रात 2:30 बजे एक “भूतिया बारात” निकलती है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, गांव के बाहर पुरानी पगडंडी से ढोल-ताशों की आवाज़ आती है, जैसे कोई शादी हो रही हो। लेकिन जब कोई पास जाता है, तो सब गायब हो जाता है — सन्नाटा, धुंआ और कभी-कभी एक सफेद घोड़ा अकेला दिखता है।

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

ये डरावनी कहानी शुरू होती है 1987 से। रविंद्र नाम के एक युवक की शादी तय हुई थी, लेकिन शादी के ठीक एक दिन पहले उसकी बारात जाते समय बस एक्सीडेंट में मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि पूरे परिवार की मौके पर ही मौत हो गई।

लोगों ने कहा कि रविंद्र की आत्मा अधूरी शादी के कारण भटक रही है। तभी से हर पूर्णिमा की रात, वह अपनी “अधूरी बारात” लेकर गांव के पास आती है।

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

रविंद्र की आत्मा अधूरी शादी के कारण भटक रही है

“मैंने खुद घोड़े की टापें सुनी हैं,” कहते हैं 62 वर्षीय किसान हरिशंकर। “जब मैं खेतों से लौट रहा था, तो रास्ते में ढोल सुनाई दिए और अचानक मेरे सामने सफेद बग्घी जैसी आकृति आई और पलक झपकते ही गायब हो गई।”

पिछले 5 सालों में कई लोगों ने इस ‘बारात’ को देखने का दावा किया है। कुछ लोगों ने तो मोबाइल से वीडियो बनाने की भी कोशिश की, पर रिकॉर्डिंग ब्लर और साउंडलेस निकली।

गांव के मंदिर के पुजारी ने एक बार वहां पूजा भी करवाई, लेकिन उसका कहना है कि “यह आत्मा सिर्फ विवाह की अंतिम रीत निभाने आई है, वो किसी को नुकसान नहीं पहुँचाती — पर डर जरूर लगता है।”

रात 2:30 बजे दूल्हे की आत्मा बारात लेकर आती है

गांव के युवाओं में अब यह एक ‘डर की चुनौती’ बन चुका है — कि कौन उस रात अकेले मंदिर के रास्ते से गुजर सकता है।

रहस्य, डर, और लोककथा का यह मिश्रण चाँदवाली को भारत के सबसे रहस्यमयी गांवों में गिनता है। सरकार ने वहां पर्यटकों की एंट्री को भी नियंत्रित कर दिया है।

जो बात सबसे अजीब है, वह यह — हर पूर्णिमा को 2:30 बजे उस पगडंडी पर एक सफेद घोड़े के निशान जरूर मिलते हैं।

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