रेखा गुप्ता सरकार ने शराब नीति से कितना कमाने का रखा है लक्ष्य? जानिए पूरा प्लान


रेखा गुप्ता सरकार ने शराब नीति से कितना

दिल्ली की नई शराब नीति सिर्फ सुरक्षा और पारदर्शिता पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत राजस्व रणनीति भी छुपी है।

रेखा गुप्ता सरकार ने साफ़ तौर पर कहा है कि वह दिल्ली की शराब बिक्री से आने वाली कमाई को नए स्तर पर ले जाना चाहती है — और इसके लिए पूरी योजना बनाई गई है।

आइए समझते हैं कि इस नई नीति से सरकार को कितना कमाई का लक्ष्य है और इसे कैसे हासिल किया जाएगा।


सरकार का कमाई लक्ष्य क्या है?

वर्तमान में दिल्ली सरकार को शराब बिक्री से हर साल करीब ₹6,400 करोड़ का राजस्व मिलता है।

नई नीति के लागू होने के बाद सरकार का अनुमान है कि यह आंकड़ा बढ़कर ₹9,000–₹9,500 करोड़ तक पहुंच सकता है।

इसका मतलब है — 25 से 35% तक की अतिरिक्त कमाई, जो दिल्ली के विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के लिए उपयोग होगी।


यह लक्ष्य कैसे पूरा किया जाएगा?

सरकार ने अपने राजस्व बढ़ाने के लिए निम्नलिखित 5 रणनीतियाँ तय की हैं:

  1. ई-नीलामी प्रणाली: सभी लाइसेंस डिजिटल टेंडर के माध्यम से पारदर्शी ढंग से दिए जाएंगे, जिससे ज्यादा बोली और राजस्व बढ़ेगा।
  2. अवैध दुकानों पर सख्त कार्रवाई: अवैध बिक्री पर लगाम से सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
  3. डिजिटल ट्रांजैक्शन अनिवार्य: टैक्स चोरी रोकी जाएगी और हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड मिलेगा।
  4. नई कीमतों की स्लैब: ब्रांड्स के अनुसार कराधान को फिर से निर्धारित किया गया है।
  5. प्रति दुकान बिक्री लक्ष्य: हर दुकान को एक मासिक राजस्व टार्गेट दिया जाएगा।

इस राजस्व से क्या होगा?

सरकार ने संकेत दिए हैं कि शराब बिक्री से मिलने वाली अतिरिक्त कमाई को निम्नलिखित क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा:

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा परियोजनाएँ

सरकारी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार

दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

यमुनापार विकास योजनाएँ

डिजिटल प्रशासन और ट्रैकिंग सिस्टम में निवेश


पिछले आंकड़ों से तुलना

पिछली सरकार की शराब नीति के दौरान, तमाम विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण सरकार को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल सका था।

रेखा गुप्ता सरकार का मानना है कि यह नई नीति इन सभी गड़बड़ियों को सुधारकर राजस्व में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दिला सकती है।


व्यापारियों और विशेषज्ञों की राय

व्यापारियों का मानना है कि टैक्स स्ट्रक्चर स्पष्ट होने से कारोबार में स्थिरता आएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नीति को ठीक से लागू किया गया तो दिल्ली आने वाले वर्षों में शराब बिक्री से देश के टॉप 3 राज्यों में शामिल हो सकती है।

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