Israel–Iran confrontation deepens

श्चिम एशिया में एक नई जंग की आहट साफ सुनाई देने लगी है। इसराइल और ईरान के बीच बीते कुछ दिनों से चल रही तनातनी अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अमेरिका की सीधे हस्तक्षेप के बाद यह टकराव और भड़क उठा है।
चाहे वो हवाई हमले हों, मिसाइल हमले हों या कूटनीतिक धमकियाँ — पूरी दुनिया इस संघर्ष को चिंताजनक नजरों से देख रही है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?

13 जून को इसराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान जैसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर एकाएक हमला कर दिया। इन हमलों में ड्रोन और एयरस्ट्राइक दोनों शामिल थे।
ईरान ने इसका जवाब 19 जून को दिया — उसने 150 से ज़्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 100 से ज्यादा आत्मघाती ड्रोन इसराइल की ओर दागे। हालांकि इसराइल की एडवांस्ड मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने अधिकतर हमले नाकाम कर दिए, लेकिन कुछ मिसाइलें नागरिक इलाकों तक पहुंच गईं।
US अब अमेरिका भी मैदान में Israel–Iran confrontation deepens:
21 जून को अमेरिका ने सीधे इस संघर्ष में प्रवेश किया। उसके B-2 स्टेल्थ बॉम्बर्स ने ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु ठिकानों को टारगेट किया — जिन पर 30,000 पौंड के बंकर-बस्टर बम गिराए गए। यह कार्रवाई अमेरिका ने बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बयान दिया — “हम ईरान को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने आगे हमला किया, तो इसके परिणाम और गंभीर होंगे।”
वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री ने कहा — “यह पश्चिम एशिया की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम है।”
जनता पर कहर
इस पूरे संघर्ष में सबसे अधिक नुकसान आम नागरिकों को हुआ है।
ईरान का दावा है कि हमलों में अब तक 650 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 250+ आम नागरिक हैं।
वहीं इसराइल में करीब 24 लोगों की मौत हुई है और 400 से ज़्यादा घायल हैं।
एक मिसाइल हमले में इसराइल के बीरशेवा स्थित अस्पताल को भी नुकसान पहुंचा, जिससे कई मरीज घायल हुए।
दुनिया की नजरें: शांति की अपीलें Israel–Iran confrontation deepens
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, रूस, चीन, भारत और अरब देश लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं।
सऊदी अरब और इराक जैसे देश विशेष रूप से चिंतित हैं क्योंकि उन्हें डर है कि यह लड़ाई क्षेत्रीय संकट का रूप न ले ले।
आगे क्या हो सकता है?
इसराइल अब यह स्पष्ट कर चुका है कि वह ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करके ही रुकेगा।
अमेरिका और ज़्यादा सैन्य संसाधन भेज रहा है और उसके नौसैनिक बेड़े फारस की खाड़ी में पहुँच चुके हैं।
ईरान फिलहाल प्रत्यक्ष संघर्ष से पीछे हट सकता है लेकिन वह अपने “प्रॉक्सी” (जैसे हिज़्बुल्लाह, हौथी विद्रोही) के ज़रिए पलटवार की रणनीति अपना सकता है।
यह सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि चेतावनी है Israel–Iran confrontation deepens
इसराइल–ईरान टकराव सिर्फ दो देशों का युद्ध नहीं है। यह दुनिया के भविष्य की स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय राजनीति का भी सवाल है।
इस समय दुनिया को जिस चीज़ की सबसे ज़रूरत है — वह है: शांति, संयम और संवाद।

























