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रेखा गुप्ता सरकार की शराब नीति से बदल
दिल्ली में शराब कारोबार से जुड़ी गतिविधियों में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रेखा गुप्ता सरकार की नई शराब नीति ने व्यापारियों, निवेशकों और आम जनता के बीच एक नई चर्चा छेड़ दी है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह नई नीति बाजार के गणित को पूरी तरह से पलट देगी?
नई लाइसेंस नीति से बदलेगा वितरण मॉडल
नई नीति के अंतर्गत शराब के ठेकों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब पुराने टेंडरिंग मॉडल को हटाकर ई-नीलामी प्रणाली लागू की जा रही है।
इससे बड़े कॉरपोरेट घरानों को फायदा हो सकता है, लेकिन छोटे स्तर के ठेकेदारों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
पारंपरिक व्यापारियों की चिंता
नई नीति से छोटे विक्रेताओं को यह डर सता रहा है कि
उन्हें ई-नीलामी में शामिल होना मुश्किल होगा
बड़े ब्रांड्स उनका बाजार हथिया सकते हैं
उनका मुनाफा घटेगा और खर्चे बढ़ेंगे
वहीं सरकार का तर्क है कि पारदर्शिता बढ़ेगी और सिस्टम में ईमानदारी आएगी।
टैक्स संरचना और लाभ
सरकार ने नई नीति के तहत शराब पर टैक्स स्ट्रक्चर को भी दुरुस्त किया है। अब बिक्री पर सीधा टैक्स लगेगा और नकद लेन-देन पर पाबंदी रहेगी।
इससे टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी और सरकार को ज्यादा राजस्व मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस नीति से सालाना ₹9,000 करोड़ से ज्यादा की कमाई हो।
दुकानों की संख्या पर असर
दिल्ली में पहले करीब 850 शराब की दुकानें संचालित थीं। नई नीति के तहत यह संख्या घटाई या फिर जोनल स्तर पर संतुलित की जा रही है।
जहाँ जनसंख्या ज्यादा है, वहाँ ज्यादा दुकानें होंगी, लेकिन रिहायशी और धार्मिक क्षेत्रों में शराब की दुकानें बंद की जाएंगी।
बाजार में किसका फायदा, किसका नुकसान?
फायदा
बड़े ब्रांड्स और मल्टी-आउटलेट कंपनियों को
जिनके पास टेक्नोलॉजी और ई-नीलामी का अनुभव है
सरकार को बढ़ा हुआ टैक्स
नुकसान:
पारंपरिक विक्रेताओं और छोटे ठेकेदारों को
जिनका नेटवर्क फिक्स था
जो पुराने सिस्टम पर निर्भर थे
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नीति बदलावों से भरपूर है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो दिल्ली में शराब व्यापार अधिक संरचित, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बन सकता है।























