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स्मार्टफोन और संप्रभुता जापान ने दिखाया
हम अपने स्मार्टफोन को जितना पर्सनल मानते हैं, उतना ही यह राष्ट्रीय सीमाओं से भी जुड़ चुका है। हर कॉल, हर डेटा पैकेट और हर ऐप हमारे देश की डिजिटल संप्रभुता को छूता है। और यही वजह है कि जापान ने Google Pixel 7 पर सख्त कदम उठाकर टेक्नोलॉजी को एक आईना दिखा दिया है — कि हर स्मार्टफोन को नियमों के दायरे में रहना ही होगा।
🇯🇵 जापान का फैसला: संप्रभुता पहले
जापान की सरकार ने Pixel 7 को लेकर आपत्ति जताई कि यह स्मार्टफोन उन रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड्स का उपयोग करता है जो देश की आपातकालीन और सुरक्षा सेवाओं में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इस आधार पर Pixel 7 की बिक्री और वितरण पर बैन लगा दिया गया।
महिला दृष्टिकोण टेक्नोलॉजी सिर्फ स्टाइल नहीं, जिम्मेदारी भी
आज की महिला टेक्नोलॉजी में सिर्फ उपभोक्ता नहीं रही — वह उपयोग के साथ-साथ समझ भी रखती है। वह जानती है कि एक फोन केवल सेल्फी लेने या शॉपिंग करने का जरिया नहीं है, बल्कि उसकी पर्सनल जानकारी, उसकी पहचान, और उसका आत्म-सम्मान उस डिवाइस से जुड़ा है।
जब एक देश टेक कंपनी को नियमों का पाठ पढ़ाता है, तो महिलाएं भी सीखती हैं कि उन्हें भी ब्रांड से जवाबदेही मांगने का अधिकार है।
डिजिटल सीमा रेखाएं
जैसे देश की भौगोलिक सीमाएं होती हैं, वैसे ही अब डिजिटल सीमाएं भी हैं। और इन सीमाओं की रक्षा करना सरकारों का ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं का भी कर्तव्य है — खासतौर पर महिलाओं का, जो साइबर अपराधों का सबसे बड़ा लक्ष्य होती हैं।
Pixel 7 का बैन एक संदेश है — टेक्नोलॉजी बड़ी हो सकती है, लेकिन नियमों से बड़ी नहीं।
अब आगे क्या?
क्या यह केवल Pixel 7 तक सीमित रहेगा? या Google के अन्य डिवाइस — Pixel 8, Pixel Fold आदि — भी जांच के घेरे में आएंगे? विशेषज्ञ मानते हैं कि अब वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों को ज्यादा पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी से काम करना होगा।