नई नीति में महिलाओं की सुरक्षा सबसे ऊपर- शराब की बिक्री से जुड़ी शर्तें और नियम


नई नीति में महिलाओं की सुरक्षा सबसे ऊपर

दिल्ली की शराब नीति को लेकर रेखा गुप्ता सरकार ने जो नई दिशा चुनी है, उसमें सबसे अहम बात है — महिलाओं की सुरक्षा। शराब की दुकानों को लेकर अब तक जो सबसे बड़ी आलोचना होती थी, वह थी महिलाओं का असुरक्षित महसूस करना।

नई नीति इस चिंता को न केवल स्वीकार करती है, बल्कि इससे निपटने के लिए ठोस प्रावधान भी लाती है।


महिला सुरक्षा के लिए नीति में क्या-क्या बदला?

रेखा गुप्ता सरकार ने यह साफ किया है कि किसी भी शराब दुकान को खोलने से पहले इन बिंदुओं का पालन करना अनिवार्य होगा:

स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और धार्मिक स्थलों से 100 मीटर की दूरी अनिवार्य

सभी दुकानों पर महिला सुरक्षा गार्ड की तैनाती जरूरी

रात 10 बजे के बाद कोई दुकान नहीं खुलेगी

हर दुकान पर हाई-क्वालिटी CCTV कैमरे अनिवार्य होंगे

शराब सेवन को खुले में प्रोत्साहन देने पर सख्त जुर्माना


महिला उपभोक्ताओं और राहगीरों की भावनाओं को अहमियत

शराब की दुकान के आसपास खड़े लोग, शराब सेवन की जगहों पर बढ़ती भीड़ — ये चीजें दिल्ली की महिलाओं के लिए अक्सर असहज स्थिति पैदा करती थीं।

नई नीति में यह स्वीकार किया गया है कि महिलाएं जब राह चलती हैं, तो उन्हें सुरक्षा की भावना मिलनी चाहिए — न कि डर का सामना करना।


दुकानों को लेकर नई लोकेशन पॉलिसी

नई नीति के मुताबिक, रिहायशी कॉलोनियों के भीतर अब कोई शराब दुकान नहीं खुलेगी। इसके अलावा:

भीड़भाड़ वाले मेट्रो स्टेशन, बस अड्डे के पास शराब दुकानें बंद होंगी

ऐसी जगहों पर जहां महिलाएं अक्सर समूहों में आती-जाती हैं — जैसे मार्केट, स्कूल रोड, क्लीनिक — वहाँ शराब दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


निगरानी होगी डिजिटल और सख्त

सरकार ने ऐलान किया है कि हर दुकान को एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इससे किसी भी प्रकार की शिकायत या छेड़छाड़ की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिलेगा।

यह कदम खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।


महिला संगठनों और जनसंख्या समूहों से सलाह

नई शराब नीति बनाने से पहले महिला संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नेताओं से राय ली गई थी।

उनकी सलाह के अनुसार ही नियमों को तैयार किया गया, ताकि यह नीति जमीनी स्तर पर प्रभावी हो सके।


सरकार का रुख स्पष्ट

रेखा गुप्ता सरकार का कहना है कि यह नीति केवल कारोबार या टैक्स के लिए नहीं, बल्कि “सुरक्षित समाज” की नींव रखने के लिए बनाई गई है।

सरकार मानती है कि शराब बिक्री की आज़ादी के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।

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