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नई शराब नीति पर रेखा गुप्ता सरकार का
दिल्ली की राजनीति में शराब नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली नई सरकार ने राजधानी की मौजूदा शराब नीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। इस कदम को दिल्ली के सामाजिक माहौल, कानून-व्यवस्था और आर्थिक संरचना को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
इस नई नीति में कई बड़े सुधार शामिल हैं, जिनका असर आम जनता, व्यापारियों और कानून-व्यवस्था पर सीधे रूप से देखने को मिलेगा।
क्या है नई शराब नीति का मूल उद्देश्य?
रेखा गुप्ता सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य है:
अवैध शराब की बिक्री को रोकना
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना
शराब से होने वाले राजस्व को पारदर्शी और कानूनी ढंग से बढ़ाना
भ्रष्टाचार पर सख्ती से रोक लगाना
सरकार ने साफ़ कर दिया है कि यह नीति न केवल आर्थिक सुधार का माध्यम बनेगी, बल्कि सामाजिक संतुलन भी बनाएगी।
लाइसेंसिंग व्यवस्था में बदलाव
नई नीति के तहत लाइसेंस प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना दिया गया है। अब शराब दुकानों के लाइसेंस ई-नीलामी के जरिए दिए जाएंगे, जिससे भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो सके।
इसके अलावा लाइसेंस शुल्क और दुकान खोलने के नियमों में भी नई शर्तें जोड़ी गई हैं।
महिला सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया
रेखा गुप्ता सरकार ने साफ़ कहा है कि जहाँ महिलाओं की सुरक्षा खतरे में आ सकती है, वहाँ शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी। नई नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि:
स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में कोई दुकान नहीं खुलेगी।
सभी दुकानों में CCTV कैमरे और महिला सुरक्षा अधिकारी अनिवार्य होंगे।
शराब की दुकानें शाम 10 बजे के बाद बंद कर दी जाएंगी।
राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य भी तय
दिल्ली सरकार का इरादा है कि नई शराब नीति से सालाना ₹9,000 करोड़ से अधिक का राजस्व इकट्ठा किया जा सके। पहले यह आंकड़ा ₹6,400 करोड़ था। इसके लिए टैक्स कलेक्शन सिस्टम को ऑटोमेटेड और रेगुलेट किया जा रहा है।
अवैध शराब और ठेकों पर शिकंजा
नई नीति के तहत पुलिस और आबकारी विभाग को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं ताकि:
अवैध बिक्री पर तुरंत कार्रवाई हो सके
बिना लाइसेंस की दुकानों को सील किया जा सके
‘ड्राई डे’ के उल्लंघन पर कड़ी सजा दी जा सके
लोगों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
जहाँ एक ओर व्यापारी वर्ग इस नीति को लेकर थोड़े चिंतित हैं, वहीं आम जनता और महिला संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह नीति ठीक से लागू होती है, तो दिल्ली में शराब से जुड़े अपराधों में कमी आ सकती है।
