स्कूलों में यूनिफॉर्म को लेकर बड़ा बदलाव
देशभर के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों की यूनिफॉर्म को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने अब यह अधिकार राज्य सरकारों को दे दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों में स्कूल यूनिफॉर्म का डिज़ाइन, रंग और फैब्रिक खुद तय करें।
अब तक अधिकतर राज्यों में यूनिफॉर्म के मानक पुराने दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित होते थे। लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत यह बदलाव लाया गया है ताकि स्थानीय जलवायु, सामाजिक संदर्भ और पारंपरिक पहनावे को ध्यान में रखा जा सके।
उदाहरण के तौर पर, राजस्थान, गुजरात जैसे गर्म इलाकों में अब हल्के सूती कपड़े का उपयोग किया जाएगा, जबकि उत्तराखंड, हिमाचल जैसे पहाड़ी इलाकों में ऊनी जैकेट्स या स्वेटर यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाए जाएंगे। इसी तरह, पूर्वोत्तर राज्यों में पारंपरिक बुनाई और रंगों को यूनिफॉर्म में शामिल करने की योजना है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बच्चों को आरामदायक, सस्ती और गौरवपूर्ण यूनिफॉर्म देना है, जिससे उनकी स्कूली उपस्थिति और आत्मविश्वास बढ़ सके। इसके साथ ही स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे यूनिफॉर्म का निर्माण स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करवाएं ताकि ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा मिल सके।
कुछ राज्य सरकारों ने इस फैसले पर अमल शुरू कर दिया है। जैसे कि मध्य प्रदेश में अब यूनिफॉर्म में ‘स्कूल का लोगो’ और बच्चों के रोल नंबर की कढ़ाई कराना अनिवार्य किया जा रहा है। वहीं तमिलनाडु में यूनिफॉर्म के रंगों को स्कूल की शिक्षा नीति के अनुरूप तय किया जाएगा।
अभिभावकों और शिक्षकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि एक जैसी यूनिफॉर्म जरूरी है, लेकिन स्थानीय जरूरतों के अनुसार उसमें लचीलापन भी जरूरी है।



























