Kubera Movie Review
परिचय
शेखर कम्मुला की नई फिल्म कुबेरा उनके अब तक के काम से बिल्कुल अलग है। जहाँ वे आम तौर पर रोमांटिक और रियलिस्टिक कहानियों के लिए जाने जाते हैं, वहीं इस बार उन्होंने एक धोखाधड़ी और घोटाले की दुनिया को पर्दे पर उतारा है। फिल्म में धनुष और नागार्जुन मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि रश्मिका मंदाना कहानी में एक अहम मोड़ लाती हैं।
कहानी की झलक Kubera Movie Review के साथ
जिम सर्भ द्वारा निभाया गया नीरज मित्रा, एक क्रूर बिज़नेसमैन है जो देश के तेल भंडारों पर कब्जा कर सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ना चाहता है। इसके लिए उसे लगभग ₹1 लाख करोड़ रुपये की ज़रूरत है — और वह इस काम में फंसा देता है जेल में बंद एक ईमानदार CBI अधिकारी दीपक (नागार्जुन) को।
दीपक को मजबूरन चार अनपढ़ भिखारियों के नाम पर ट्रांज़ैक्शन करना पड़ता है, जिनमें से एक है देवा (धनुष)। जैसे ही काम पूरा होता है, नीरज उन्हें मारने की योजना बनाता है। लेकिन दीपक और देवा उस साजिश को समझ जाते हैं और अब लड़ाई होती है सत्ता और सच्चाई के बीच।
फिल्म की खासियत और विश्लेषण
शेखर कम्मुला ने इस फिल्म में एक असामान्य हीरो चुना — एक भिखारी, जो हालातों के कारण बड़ा काम कर जाता है। फिल्म एक भावनात्मक सामाजिक संदेश देती है कि असली दौलत दूसरों की ज़िंदगी बेहतर करने में है, न कि पैसों के ढेर में।
रश्मिका की भूमिका कहानी में नयापन लाती है, और उनकी एंट्री देवा की ज़िंदगी में एक नया अध्याय खोलती है। हालांकि, कुछ दृश्य जैसे कि एक ताकतवर विलेन का भिखारी बन जाना थोड़ा अविश्वसनीय लगता है।
अभिनय की बात करें तो Kubera Movie Review डिसकस करें
- धनुष देवा के रूप में बेहद ईमानदार और इमोशनल लगते हैं।
- नागार्जुन एक आदर्श CBI अधिकारी के रूप में शानदार हैं, जो खुद के सिद्धांतों और हालात के बीच झूलता है।
- रश्मिका की भूमिका संवेदनशील और दिलचस्प है।
- जिम सर्भ ने खलनायक के रूप में दमदार प्रदर्शन दिया है।
टेक्निकल पक्ष
- छायांकन (कैमरा वर्क): निकेत बोम्मी रेड्डी ने बेहतरीन विजुअल टोन सेट किया है।
- संगीत: देवी श्री प्रसाद का म्यूजिक फिल्म की भावनात्मक गहराई को और बेहतर करता है।
गाने जैसे “पोइरा मावा” और “ना कोडुका” खास असर छोड़ते हैं। - एडिटिंग: कुछ हिस्से थोड़े खिंचे हुए लगते हैं, जिन्हें थोड़ा और टाइट किया जा सकता था।
अंतिम निष्कर्ष
Kubera Movie Review एक अलग और साहसिक प्रयास है, जहाँ शेखर कम्मुला ने अपनी पारंपरिक शैली से हटकर एक नई दिशा में कदम रखा है। फिल्म सामाजिक असमानता और नैतिक संघर्ष को दिखाती है, जिसमें इमोशनल एंगल, मजबूत परफॉर्मेंस और एक गहरा संदेश छिपा है। थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन दर्शकों को जोड़े रखने में कामयाब रहती है।