बेटियों को लेकर बड़ा फैसला
देश में किशोरियों की सेहत और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिलकर निर्णय लिया है कि अब से देशभर के सरकारी स्कूलों में 6वीं से 10वीं कक्षा की छात्राओं के लिए “मासिक धर्म स्वास्थ्य सत्र” (Period Health Session) अनिवार्य रूप से आयोजित किए जाएंगे।
यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत “स्वस्थ बालिका – सशक्त भारत” अभियान को मजबूत बनाने के लिए लिया गया है। इन हेल्थ सेशन्स में लड़कियों को पीरियड्स से जुड़ी सामान्य जानकारी, स्वच्छता के नियम, संक्रमण से बचाव और आत्म-सुरक्षा के टिप्स दिए जाएंगे।
बड़ी बात यह है कि इस पहल को सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों, आदिवासी इलाकों और छोटे कस्बों के सरकारी स्कूलों में भी विशेष महिला प्रशिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी जो स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण देंगी। इसके अलावा हेल्थ सेशन्स के बाद हर छात्रा को सरकार की ओर से एक महीने का सैनिटरी पैड किट मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई क्षेत्रों में अभी भी किशोरियां मासिक धर्म से जुड़ी जानकारी के अभाव में शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझती हैं। वे स्कूल नहीं जातीं, खुद को अलग-थलग महसूस करती हैं और कई बार संक्रमण का भी शिकार हो जाती हैं। इस पहल से इन सभी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
सरकार ने इस अभियान को “शक्ति सप्ताह” नाम से हर महीने की शुरुआत में मनाने का फैसला किया है। इसमें स्वास्थ्य शिविर, काउंसलिंग, सवाल-जवाब सत्र और महिला डॉक्टरों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी।
स्कूलों के शिक्षकों को भी इस विषय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे छात्राओं से खुलकर संवाद कर सकें और इस विषय को सामान्य बनाएँ। अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा ताकि वे घर पर अपनी बेटियों से इस विषय पर खुलकर बात करें।
इस फैसले का स्वागत देशभर के सामाजिक संगठनों, एनजीओ और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने किया है। उनका कहना है कि यह कदम न सिर्फ बेटियों की शारीरिक सेहत को बेहतर करेगा बल्कि उन्हें आत्म-विश्वास से भी भर देगा।