“लाल बिंदी वाली औरत, जो हर रविवार रात हॉस्पिटल
दिल्ली के एक पुराने सरकारी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ
दिल्ली के एक पुराने सरकारी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ और मरीजों के बीच एक नाम पिछले कुछ महीनों से डर और रहस्य का कारण बन गया है — “लाल बिंदी वाली औरत।”
यह नाम सिर्फ एक अफवाह नहीं है, बल्कि हर बुधवार की रात हॉस्पिटल के तीसरे फ्लोर के खाली वार्ड में लोग किसी औरत को लाल साड़ी और बड़ी लाल बिंदी में टहलते हुए देखते हैं।
नर्स रीता (बदला हुआ नाम) बताती है, “रात के दो बजे के करीब जब मैं दवाइयाँ लेकर वार्ड 309 की तरफ जा रही थी, तब मैंने देखा कि कोई औरत खड़ी है खिड़की के पास। मैंने सोचा कोई पेशेंट होगी, पर जब मैं पास पहुंची तो वह अचानक गायब हो गई।”
इस तरह की घटनाएं कई बार रिपोर्ट की गई हैं। न केवल नर्स बल्कि सिक्योरिटी गार्ड और सफाई कर्मचारी भी इस लाल बिंदी वाली महिला को देखने का दावा कर चुके हैं। हर बार उसका चेहरा अस्पष्ट, लेकिन डरावना बताया जाता है — जैसे आंखें बहुत चौड़ी हों, और शरीर हवा में तैरता सा लगे।
“लाल बिंदी वाली औरत, जो हर रविवार रात हॉस्पिटल
यही हॉस्पिटल लगभग 20 साल पहले भी चर्चाओं में था
पुरानी फाइलों से पता चलता है कि यही हॉस्पिटल लगभग 20 साल पहले भी चर्चाओं में था जब एक गर्भवती महिला की लापरवाही के चलते मौत हो गई थी। आरोप था कि न तो डॉक्टर टाइम पर पहुंचे, न ही स्टाफ ने ध्यान दिया। तबसे उसकी आत्मा को हॉस्पिटल के तीसरे फ्लोर पर भटकते देखा गया।
एक CCTV फुटेज भी सामने आया है जिसमें 3:00 AM पर कॉरिडोर में एक धुंधली आकृति चलती नजर आती है। जब क्लिप को स्लो-मोशन में देखा गया, तो उसमें साफ लाल रंग की परछाईं और बड़ी बिंदी दिखती है।
कुछ मरीजों ने तो यह भी दावा किया कि उन्हें कोई औरत रोज़ रात उनके बेड के पास खड़ी दिखती है, जो धीमी आवाज में कहती है, “मेरे बच्चे को बचा लो…”
“लाल बिंदी वाली औरत, जो हर रविवार रात हॉस्पिटल
एक CCTV फुटेज भी सामने आया है जिसमें 3:00 AM पर कॉरिडोर
प्रबंधन ने कई बार उस वार्ड को बंद करने की कोशिश की लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण उसे फिर से खोलना पड़ा। आज भी वह वार्ड 309, नर्सों के बीच “भूतों वाला वार्ड” कहलाता है।
डॉक्टर इसे मानसिक भ्रम या काम के तनाव का नतीजा बताते हैं, पर जब एक साथ चार लोग एक ही रात एक जैसी महिला को देखते हैं, तो सवाल उठते हैं।
क्या यह आत्मा इंसाफ मांग रही है? या यह डर एक सामाजिक मनोवैज्ञानिक भ्रम है जो अस्पताल की थकान भरी रातों में सच लगने लगता है?
पर जो कोई भी उस हॉस्पिटल में काम कर चुका है, वो ये मानता है कि बुधवार की रात 3 बजे, तीसरे फ्लोर पर कुछ न कुछ तो ज़रूर होता है…
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