That street of Varanasi where the funeral pyre
वाराणसी, एक शहर जो भगवान शिव की नगरी कहा जाता है, अपने घाटों और पूजा-पाठ के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन यहां की एक गली “रत्नेश्वर गली” अब धीरे-धीरे अपने भयानक रहस्य के लिए जानी जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस गली में हर अमावस्या की रात, एक चिता अपने आप जलती है — बिना किसी शव के, बिना लकड़ियों के, सिर्फ आग। और उस चिता से जो चीखें आती हैं, वे इंसानी नहीं लगतीं।
गली के बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 40 साल पहले इसी जगह एक साध्वी को जिन्दा जला दिया गया था। उस पर डायन होने का आरोप था। गांव के लोगों ने मिलकर उसे इस गली के आखिरी कोने में बाँधकर आग लगा दी थी। जब तक पुलिस पहुंची, उसका शरीर राख हो चुका था।
आज तक उस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, और न ही किसी को दोषी माना गया। लेकिन तब से लेकर आज तक, हर अमावस की रात गली के आखिरी कोने में एक अजीब सी रोशनी दिखती है, और आग की लपटें उठती हैं।
रामकिशोर, जो इस गली में 20 साल से मिठाई की दुकान चलाते हैं, बताते हैं, “मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है, आग अपने आप लगती है, और वहाँ से एक औरत की चीख सुनाई देती है। डर के मारे हम रात में दुकान जल्दी बंद कर देते हैं।”
That street of Varanasi where the funeral pyre गली में लगे सीसीटीवी में भी कई बार एक धुंधली छाया दिखाई दी है जो गली के किनारे-किनारे चलती है, फिर एकदम आग के पास गायब हो जाती है।
कुछ लोगों ने कोशिश की उस रात वहां रुकने की, लेकिन सुबह वो बीमार, पागल या बेहोश मिले।
स्थानीय पुजारियों ने वहां पूजा और हवन करवाया, पर कुछ भी स्थायी रूप से नहीं रुका।
आज यह गली “शापित गली” के नाम से जानी जाती है। पर्यटक तो दूर, स्थानीय भी अब वहां रुकने से डरते हैं।
बड़ा सवाल ये है कि क्या ये आत्मा अब भी न्याय की मांग कर रही है? क्या आग के साथ चीखती वो औरत सच में कोई प्रेत है या हमारे पापों की परछाई?
जो भी हो, रत्नेश्वर गली अब सिर्फ बनारस की एक गलियों में से नहीं, बल्कि एक चेतावनी बन चुकी है — “आत्मा की चिता वहां आज भी जलती है…”
